आधुनिक भवनों में उत्पन्न वास्तु दोषों का परिहार
वास्तुशास्त्र के अनुसार भवन की दिशाओं एवं कमरों की उचित स्थिति का हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव माना जाता है। आधुनिक भवनों एवं फ्लैटों के निर्माण में कई बार वास्तु सिद्धांतों की अनदेखी हो जाती है, जिससे वास्तु दोष उत्पन्न हो सकते हैं। प्रमुख वास्तु दोष एवं परिहार 1. घर में बार-बार बीमारी होना: यदि परिवार के सदस्य बार-बार अस्वस्थ रहते हैं, तो भवन की दिशाओं, ईशान कोण एवं स्वच्छता का वास्तु परीक्षण करवाएं। चिकित्सकीय उपचार भी आवश्यक है। 2. दिशाओं के अनुसार कमरे: ईशान कोण में पूजा घर, आग्नेय कोण में रसोईघर, नैऋत्य कोण में मुख्य शयनकक्ष तथा वायव्य कोण में अतिथि कक्ष बनाना वास्तु के अनुसार अनुकूल माना जाता है। 3. पूजा घर में वास्तु दोष: पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) सर्वोत्तम माना जाता है। पूजा स्थल को स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखें। 4. रसोईघर एवं शौचालय: रसोईघर आग्नेय कोण में रखना शुभ माना जाता है। शौचालय को स्वच्छ, हवादार एवं व्यवस्थित रखें। 5. बिना तोड़-फोड़ के परिहार: आधुनिक फ्लैट एवं भवनों में फर्नीचर की उचित व्यवस्था, प्रकाश, वायु एवं उपलब्ध स्थान के अनुसार वास्तु उपाय अपनाए जा सकते हैं। निष्कर्ष भवन निर्माण अथवा नया फ्लैट खरीदने से पहले वास्तु परीक्षण अवश्य करवाएं। उचित वास्तु परामर्श से भवन में सकारात्मक एवं संतुलित वातावरण बनाने में सहायता मिल सकती है। पंडित बांके बिहारी वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु सलाहकार Mob-9971656158